ऐसे लोग दूसरे के घरों में लड़ाई झगड़े का कारण बनते है।

शादीशुदा आदमी की जिंदगी सरकारी बस जैसी होती है। 
दिनभर कहीं भी घूमो लेकिन रात को डिपो में जमा होना ही पड़ता हैं।
एक बनिये ने दूसरे बनिये के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई कि
उसने मुझे तीन किलो के बाँट से मारा।
पुलिस परेशान कि 3 किलो का बाट कहाँ से आ गया। 
बाद में बनिये ने ही पुलिस को यों समझाया.....
पहले मैंने इसे 2 किलो के बाट से मारा , फिर इसने मुझे 5 किलो के बाट से मारा। 
 
2 किलो का हिसाब तो नक्की हो गया। बचे तीन किलो की रिपोर्ट मैंने लिखाई है।.......
 
 हिसाब तो आखिर हिसाब होता है!! है ना? 
पहले पता होता कि चुनावी सभाओं से वायरस  से बचा जा सकता है तो 6 महीने पहले ही चुनाव करवा देते।

कैडबरी वाले इतना एड करते हैं ,फिर भी दीपावली में सोनपापड़ी का मार्केट हिला नहीं पाते है।


नखरे तो शादी से पहले होते हैं बाद में तो लौकी की सब्जी खाने के बाद कहना पड़ता है:-
तुम्हारे हाथों में तो जादू है जादू.... जानूं